BNP NEWS DESK। Jaish terrorists लाल किला धमाके की साजिश में शामिल पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकियों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने गिरफ्तार कर लिया है। इनमें तीन जम्मू-कश्मीर व एक लखनऊ का रहने वाला है। इनसे पहले एनआइए ने जैश के फरीदाबाद-सहारनपुर माड्यूल के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया था।
गुरुवार को गिरफ्तार किए गए चारो आतंकियों को विस्फोटक की बरामदगी के मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी थी। अब एनआइए ने इन्हें प्रोडक्शन वारंट पर लेकर दिल्ली की अदालत में पेश किया। अदालत ने 10 दिन की रिमांड पर चारों को एनआइए को सौंप दिया है।
Jaish terrorists विस्फोटक की बरामदगी के मामले में आतंकी डा. मुजम्मिल शकील गनई (पुलवामा, जम्मू-कश्मीर), डा. अदील अहमद राथर (अनंतनाग, जम्मू-कश्मीर), मुफ्ती इरफान अहमद वागे (शोपियां जम्मू-कश्मीर) और डा. शाहीन सईद (लखनऊ) को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हमले से एक दिन पूर्व अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया था।
एनआइए सूत्रों के मुताबिक, आतंकी हमले की जांच कर रही एनआइ को पता चला कि इन चारों ने लाल किला हमले की साजिश में अहम भूमिका निभाई थी, जिसमें 15 लोग मारे गए और 24 घायल हुए थे। इसके बाद एनआइए ने चारों को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया।
यहां से कोर्ट ने चारों को पूछताछ के लिए 10 दिन के लिए रिमांड पर चारो को एनआइए को सौंप दिया है। इनसे पहले एनआइए दो आतंकी आमिर राशिद अली उर्फ तारिक व जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश को गिरफ्तार कर चुकी है। इस मामले में अब तक छह लोगों को एनआइए गिरफ्तार कर चुकी है। Jaish terrorists
एनआइए ने 15 दिन की मांगी थी रिमांड
एनआइए ने चारों आतंकियों को पटियाला हाउस स्थित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू बजाज चांदना की कोर्ट में पेश कर 15 दिन की रिमांड मांगी थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 10 दिन की रिमांड दी गई।
एनआइए ने रिमांड मांगने के लिए दलील दी कि हमले की साजिश, तकनीकी प्लानिंग, माड्यूल की फंडिंग और लाजिस्टिक सपोर्ट जैसे पहलुओं को समझने के लिए लंबी पूछताछ आवश्यक है, क्योंकि यह हमला एक संगठित और योजनाबद्ध आतंकी साजिश का हिस्सा था।
एजेंसी का कहना था कि इन्होंने लाल किला के बाहर हुए हमले की साजिश और क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाई। एजेंसी छह आतंकियों की कड़ी से कड़ी जोड़कर आतंकी माड्यूल का पूरा नेटवर्क, फंडिंग कहां से आई, कार कैसे हासिल की गई और ब्लास्ट की साजिश कहां रची गई, इन सबकी जांच कर रही है।
आमिर और जासिर हैं उमर के करीबी
आमिर राशिद व जासिर बिलाल वानी जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं और उमर के करीबी रहे हैं। तारिक ने ब्लास्ट में इस्तेमाल हरियाणा नंबर की आइ-20 कार अपने नाम व आइडी पर खरीदकर उमर को दी थी। 29 अक्टूबर को उमर को कार खरीदवाने के लिए वह अपनी आइडी लेकर फरीदाबाद आया था Jaish terrorists
और धमाके से पहले दोनों फरीदाबाद में एक साथ रुके थे। लाल किला के बाहर धमाका के बाद तारिक फरार हो गया था। बाद में एनआइए ने इसे फरीदाबाद से गिरफ्तार कर लिया था। जासिर ने उमर को बम बनाने में तकनीकी मदद की थी।
धमाके में आतंकी घटना होने की जानकारी मिलने के बाद गृह मंत्रालय ने एनआइए को जांच सौंप दी थी। इस घटना में शामिल आतंकवादी माड्यूल के हर सदस्य का पता लगा उन्हें गिरफ्तार करने के लिए एनआइए छह राज्यों में छापेमारी कर रही है। Jaish terrorists
















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