बीएचयू में यूजी-पीजी की 5,074 सीटें खाली

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BHU UG-PG

BNP NEWS DESK।   BHU UG-PG काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पीएचडी के बाद स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया विलंबित हो चुकी है। प्रवेश प्रकिया अत्यधिक लंबी होने से विवि को कई स्तर पर नुकसान उठाना पड़ रहा है।

BHU UG-PG  यूजी और पीजी में करीब 5,074 सीटें खाली रह गईं हैं, हालांकि इन्हें भरने के लिए केंद्रीय प्रवेश समिति की तरफ से प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन मौजूदा हालात में वह नाकाफी सिद्ध होते दिख रहे हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि स्नातक में प्रवेश सात अगस्त जबकि परास्नातक की प्रवेश प्रक्रिया 15 अगस्त तक पूर्व के वर्षों में पूर्ण होती रही है, लेकिन इधर कुछ वर्षों से हालात बदले हैं।

प्रवेश प्रक्रिया लंबी हो चुकी है, ऐसे में केवल छात्रों का शैक्षणिक जीवन ही प्रभावित नहीं होगा बल्कि विवि की छवि, आर्थिक स्थिति और शोध कार्यों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
समय पर प्रवेश नहीं मिलने के कारण कई छात्र निजी विश्वविद्यालयों या अन्य संस्थानों का रुख कर चुके हैं। जाहिर है, इससे बीएचयू को उत्कृष्ट छात्रों की कमी का सामना करना पड़ सकता है और विश्वविद्यालय की ‘ब्रांड वैल्यू’ भी प्रभावित हो रही है।

BHU UG-PG  तीन माह से अधिक समय से चल रही यूजी-पीजी प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण होने में अभी लंबा वक्त लग सकता है। यूजी का स्पाट राउंड शुरू हुआ है जबकि पीजी के लिए मापअप राउंड कराने की तैयारी है।

विवि प्रशासन की तरफ से पीजी पाठ्यक्रमों में 2,786 और यूजी की करीब 2,288 सीटें भरने के लिए जतन किए जा रहे हैं। शोध छात्र आलोक उपाध्याय कहते हैं कि विलंबित प्रवेश प्रक्रिया के चलते कक्षाएं समय पर शुरू नहीं हो पातीं हैं, अधिकांश पाठ्यक्रम अधूरे रह जाते हैं।

परीक्षाओं में भी देरी होगी तो परिणाम आने में समय लगेगा। अगली कक्षाओं में प्रवेश प्रक्रिया भी प्रभावित होगी।

शोध छात्र मृत्युंजय तिवारी कहते हैं कि इस बार लंबी प्रक्रिया के चलते बार‑बार नोटिफिकेशन, काउंसलिंग और आवेदन सुधार की प्रक्रिया दोहरानी पड़ी, इससे आइटी सिस्टम, कर्मचारियों और हेल्पडेस्क पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा। देर से प्रवेश का असर शोध परियोजनाओं, इंटर्नशिप और प्रयोगशाला कार्यों पर पड़ेगा। छात्र उद्योग से जुड़ाव और प्लेसमेंट के अवसरों से दूर हो सकते हैं।

कुछ ऐसे चली प्रवेश प्रक्रिया

परास्नातक  :  22 मई को पंजीकरण काउंटर खोला गया, 10 जून तक पंजीकरण हुआ। 90 हजार से अधिक आवेदन आए। अगस्त के पहले सप्ताह तक मुख्य राउंड पूर्ण कर लिया गया। 19 अगस्त को स्पाट राउंड आरंभ शुरू किया गया, जबकि प्रवेशित छात्रों की कक्षाएं चार सितंबर से चालू की गईं। 30 अगस्त को मापअप राउंड का नोटिफिकेशन जारी हो गया। पांच सितंबर को मापअप राउंड शेड्यूल में बदलाव किया गया है। BHU UG-PG

स्नातक : 16 जुलाई को पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हुई थी। दो अगस्त तक पंजीकरण हुआ। एक लाख से अधिक आवेदन आए। आठ अगस्त को पहला सीट आवंटन जबकि 18 अगस्त को चौथा सीट आवंटन किया गया। 25 अगस्त को काउंसिलिंग प्रक्रिया शुरू की गई। 28 चार सितंबर से स्पाट राउंड शुरू हुआ। पंजीकरण आरंभ हुआ, सात सितंबर को शेड्यूल में बदलाव किया गया। यह प्रक्रिया 15 सितंबर तक पूर्ण होने का अनुमान है।

सीटें लाक कराए जाने से नहीं भर पाती हैं सीटें

सीटें खाली होने का बड़ा कारण यह भी है कि अधिकांश अभ्यर्थी पहले सेमेस्टर का शुल्क जमा करते हुए सीटें लाक करा लेते हैं। चूंकि निर्धारित शुल्क मामूली है, इसलिए यह प्रयोग वह कई विवि में करते हैं। यूजीसी के नियमों के अनुसार यह शुल्क वापस भी कर दिया जाता है।  BHU UG-PG

अभ्यर्थी एक साथ कई विवि की सीटें लाक कराते हैं, अंत में उन्हें जो विवि या कालेज अपनी सुविधा के अनुसार मिलता है, वह वहीं पर दाखिला ले लेते हैं। ज्यादातर अभ्यर्थी अपने घर के नजदीक के विवि या कालेज को तवज्जो देते हैं, इस बार ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या अधिक रही, जिन्होंने सीटें निरस्त कराई हैं।

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Author: BNPNEWS

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