BNP NEWS DESK। Mutual Funds बाजार नियामक सेबी ने कैश मार्केट में म्यूचुअल फंड योजनाओं के सौदों के लिए नेट सेटलमेंट की सुविधा देने का प्रस्ताव रखा है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि फंड हाउसों को हर खरीद-बिक्री सौदे के लिए अलग-अलग रकम की व्यवस्था नहीं करनी पड़ेगी और उनकी अस्थायी नकदी की जरूरत कम हो सकती है। इसका फायदा उन दिनों में ज्यादा मिलेगा जब इंडेक्स में बदलाव या रीबैलेंसिंग के कारण बाजार में एक साथ बड़ी मात्रा में खरीद-बिक्री होती है।
सेबी ने स्पष्ट किया है कि नेट सेटलमेंट की सुविधा उन्हीं लेनदेन के लिए होगी, जिनमें किसी सिक्योरिटी में सिर्फ खरीद या सिर्फ बिक्री हो। यानी अगर एक ही सिक्योरिटी में किसी योजना ने उसी समय खरीदारी भी की और बिक्री भी, तो इन दोनों को आपस में जोड़कर नेटिंग नहीं की जा सकेगी। फिलहाल म्यूचुअल फंड योजनाओं को कैश मार्केट में होने वाले सौदों के लिए अलग-अलग रकम की व्यवस्था करनी पड़ती है। मान लीजिए किसी म्युचुअल फंड योजना को एक दिन में कई शेयर खरीदने हैं और कुछ शेयर बेचने हैं। अभी इन सौदों का निपटान अलग-अलग आधार पर होता है।
यानी खरीद के लिए जितनी रकम चाहिए, उसकी व्यवस्था करनी पड़ती है, भले ही उसी दौरान कुछ शेयर बेचकर पैसा आने वाला हो। इससे कुछ समय के लिए फंड की नकदी की जरूरत बढ़ जाती है। यही वह जगह है जहां सेबी नेट सेटलमेंट की सुविधा लाने का प्रस्ताव कर रहा है। नेट सेटलमेंट को एक आसान उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए किसी म्यूचुअल फंड योजना को एक दिन में 100 करोड़ के शेयर खरीदने हैं और 70 करोड़ के शेयर बेचने हैं।
मौजूदा व्यवस्था में दोनों लेनदेन अलग-अलग होंगे। ऐसे में शेयर खरीदने के लिए 100 करोड़ की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि, नेट सेटलमेंट में खरीद और बिक्री की रकम को आपस में समायोजित किया जा सकता है। ऐसे में फंड को प्रभावी तौर पर सिर्फ 30 करोड़ की अतिरिक्त रकम की जरूरत होगी।







