रोपवे स्टेशनों में दिखेगी काशी की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान

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rope way in kashi

 BNP NEWS DESK।  Rope Way inVaranasi दुनिया का  तीसरा नगरीय परिवहन रोपवे वाराणसी में तेजी से आकार ले रहा है। रोपवे केवल यातायात का नया साधन नहीं होगा, बल्कि इसके स्टेशन काशी की धार्मिक,आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के भी साक्षी बनेंगे। रोपवे स्टेशनों पर आकार ले रही धार्मिक और आध्यात्मिक कलाकृतियां श्रद्धालुओं और पर्यटकों को   लुभाएगी।

काशी के विकास के नए अध्याय में यातायात के साथ धर्म, अध्यात्म और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। देश के पहले नगरीय परिवहन रोपवे के निर्माण के साथ ही इसके स्टेशनों को काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप सजाया जा रहा है। स्टेशनों के फसाड पर गाय, गंगा, त्रिशूल और डमरू जैसे धार्मिक प्रतीकों के साथ सारनाथ की आध्यात्मिक विरासत को दर्शाती भगवान बुद्ध की आकृतियां भी नजर आने लगी हैं। इससे स्टेशन की वास्तुकला में काशी की धार्मिक पहचान की स्पष्ट झलक दिखाई देगी। रोपवे स्टेशन की दीवारों पर गंगा और काशी के ऐतिहासिक घाटों की झलक उकेरी जा रही है।

डबल इंजन की सरकार सड़क मार्ग पर यातायात का दबाव कम करने के लिए रोपवे का निर्माण करा रही है। योगी सरकार वाराणसी की यातायात व्यवस्था को गति देने के लिए रोपवे परियोजना को तेजी से धरातल पर उतार रही है।  काशी के विकास के अध्याय में काशी के अध्यात्म के साथ यातायात के लिए नया आयाम रोपवे जुड़ने जा रहा है। ट्रांसपोर्ट टूरिज्म में टूरिस्ट आकाश से आनंद वन यानी काशी का अवलोकन कर सकेंगे। काशी के लिए यह परियोजना यातायात व्यवस्था में नया आयाम जोड़ने के साथ ही पर्यटन को भी नई दिशा देने वाली है।

वाराणसी विकास  प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने बताया कि काशी पूरी दुनिया में धर्म, अध्यात्म, संस्कृति और कला के लिए जानी जाती है। इन्हीं विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए रोपवे के स्टेशनों और गोंडोला के डिजाइन में काशी की पहचान को समाहित किया जा रहा है।

सभी स्टेशनों पर काशी की विशिष्ट परंपरा, हस्तकला, अध्यात्म, संगीत और धार्मिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी। प्रमुख मंदिरों की स्थापत्य शैली के साथ काशी की सांस्कृतिक विरासत को भी स्टेशन के डिजाइन में स्थान दिया जा रहा है।रोपवे स्टेशनों पर लगाए जा रहे चुनार के बलुआ पत्थर पर की गई नक्काशी काशी की प्राचीन इमारतों की स्थापत्य शैली से मेल खाती नजर आ रही है। पत्थर पर उकेरी गई कलाकृतियों में काशी की समृद्ध विरासत और हस्तशिल्प की झलक दिखाई दे रही है।

आकाश से काशी के दर्शन का भी मिलेगा अवसर

रोपवे काशी के यातायात को नया विकल्प देने के साथ पर्यटन को भी नया अनुभव प्रदान करेगा। ट्रांसपोर्ट टूरिज्म के तहत पर्यटक आकाश से काशी के प्रमुख हिस्सों और उसकी सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन कर सकेंगे।

गोंडोला से लेकर रोपवे स्टेशनों तक काशी की पहचान और उसकी परंपराओं की झलक दिखाई देगी। काशी के धार्मिक और आध्यात्मिक स्वरूप को आधुनिक परिवहन व्यवस्था से जोड़ने वाली यह परियोजना शहर के विकास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने जा रही है। इससे एक ओर सड़क पर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर देश-दुनिया से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को काशी को एक नए नजरिए से देखने का अवसर मिलेगा।

पांच स्टेशन जोड़ेंगे कैंट से गोदौलिया तक

कैंट से गोदौलिया तक रोपवे के पांच स्टेशन होंगे। इनमें कैंट रोपवे स्टेशन, विद्यापीठ स्टेशन,रथयात्रा स्टेशन, गोदौलिया गिरजाघर स्टेशन और गोदौलिया स्टेशन शामिल हैं। परियोजना के पहले सेक्शन के तीनों स्टेशनों का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है, जबकि दूसरे सेक्शन में गोदौलिया स्टेशन तक निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।

 

रोपवे के संचालन के बाद कैंट से गोदौलिया के बीच यात्रियों को लगभग डेढ़ से दो मिनट के अंतराल पर गोंडोला उपलब्ध कराने की योजना है। एक दिशा में एक घंटे में करीब 3,000 लोग यात्रा कर सकेंगे, जबकि दोनों दिशाओं में यह क्षमता लगभग 6,000 यात्रियों प्रति घंटे की होगी। गोदौलिया से कैंट रेलवे स्टेशन तक की दूरी रोपवे से लगभग 16 मिनट में तय की जा सकेगी। परियोजना में 148 ट्रॉली कार संचालित होंगी और प्रत्येक ट्रॉली में 10 यात्री सवार हो सकेंगे। रोपवे का संचालन प्रतिदिन करीब 16 घंटे करने की योजना है।

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Author: BNPNEWS

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