
Bhartendu Harishchandra कार्यक्रम के आरंभ में बाबू भारतेंदु हरिश्चंद्र के प्राकृति में सभी विद्वानों ने पुष्प अर्पित किया। दीपेश चौधरी ने अतिथियों का स्वागत किया।”जानकी मंगल” नाटक की ऐतिहासिक प्रासंगिकता के अंतर्गत विद्वानों ने उस समय के रंग चर्चा को सामने लाने का प्रयास किया। भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाट्य सिद्धांतों पर आधारित ग्रंथ “नाटक अथवा दृश्य काव्य सिद्धांत विवेचन” का विमोचन एवं परिचर्चा का लोकार्पण हुआ।
19 वीं सदी के काशी के अंचल और परिवेश की चर्चा
तत्पश्चात अजय रतन बैनर्जी ने 19 वीं सदी के काशी के अंचल और परिवेश की चर्चा के साथ उस समय के रंगकर्म और नाचघर, नैशनल थियेटर और बनारस थियेटर के कहां होने की संभावनाओं पर भी एक दृष्टि दी। उनका विषय था- “काशी की नाट्य भूगोल: भारतेंदु हरिश्चंद्र के समय में सार्वजनिक एवं निजी मंचन स्थलों का अध्ययन” बनारस थियेटर और नैशनल थियेटर का दस्तावेजी कारण होना बहुत।
वरिष्ठ पत्रकार सौरभ चक्रवर्ती ने डिजिटल आर्काइव बनाने का सुझाव दिया साथ ही पारदर्शिता रखने की बात कही। वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार अत्री भारद्वाज ने भारतेंदु के पत्रकारिता और रंगमंचीय दृष्टि पर प्रकाश दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर मुक्ता ने किया। अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने हिंदी रंगमंच के शोध और मानक स्थानों को संरक्षण संवर्धन की बात कही। कार्यक्रम में विभिन्न साहित्यकार, नाट्य विशेषज्ञ एवं सांस्कृतिक व्यक्तित्व इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति से समारोह को गरिमा प्रदान किया जिनमें प्रमुख रूप से प्रो अरुण जैन,अजय रतन बैनर्जी, सलीम राजा,सौरभ चक्रवर्ती, देवेंद्र गुप्ता जैसे विद्वान उपस्थित रहें, संचालन डॉक्टर शुभ्रा वर्मा ने किया।
कार्यक्रम के अंत में ने सभी विद्वतजन का धन्यवाद किया विदुषी मालिनी चौधरी ने किया।
















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