BNP NEWS DESK। Ramlila of Ramnagar रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला में हाथियों के उपयोग पर वन विभाग ने पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। पांच हाथियों से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर विभाग ने यह कार्रवाई की है। ही रामलीला में करीब 200 वर्षों से चली आ रही हाथियों के उपयोग की परंपरा टूट गई। रविवार को रामलीला संपन्न होने के साथ ही यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि अगले वर्ष लीला में हाथियों की वापसी हो पाएगी या नहीं।
पांच हाथियों के दस्तावेज नहीं दिखा सके रामलीला के पदाधिकारी
Ramlila of Ramnagar प्रभागीय वनाधिकारी निधि चौहान ने बताया कि 18 अक्टूबर को रामलीला में शामिल होने आया हाथी मस्तक मानसिक संतुलन खो बैठा था। उसने अपने महावत छापालु को घायल कर दिया था। बाद में उपचार के दौरान संक्रमण फैलने से महावत की मौत हो गई। वन विभाग के अनुसार, उस दिन हाथी पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। ऐसी घटनाओं की आशंका को देखते हुए रामनगर की रामलीला समेत अन्य लीलाओं और सार्वजनिक समारोहों में हाथियों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है।
डीएफओ ने बताया कि रामलीला से जुड़े अधिकारियों को हाथियों के आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था, लेकिन पांच में से किसी भी हाथी के संबंध में कागजात नहीं दिए गए। ऐसे में प्रतिबंध लागू कर दिया गया। अगले वर्ष भी दस्तावेज प्रस्तुत करने और आवश्यक अनुमति मिलने के बाद ही हाथियों का प्रयोग संभव होगा। प्रतिबंध का आदेश रामलीला के अंतिम दो दिनों में प्रभावी हुआ जिसके चलते हाथियों का प्रयोग नहीं किया गया। Ramlila of Ramnagar
अगले वर्ष भी अनुमति के बाद ही हो सकेगा हाथियों का उपयोग
30 दिवसीय रामलीला में प्रतिदिन चार हाथियों का इस्तेमाल होता था, जबकि शाही सवारी जैसी लीलाओं में पांच हाथी शामिल होते थे। इस बार तीन हाथी आजमगढ़, एक प्रयागराज और एक बिहार के रोहतास से किराये पर लाए गए थे। प्रतिबंध के बाद सभी हाथियों को शनिवार को ही वापस भेज दिया गया। वहीं, हाथी मस्तक की हालत अब ठीक बताई जा रही है। उसे मंगलवार को आजमगढ़ स्थित उसके घर ले जाने की तैयारी है। Ramlila of Ramnagar







