अपने ही खून का इंजेक्शन लगा रहे युवा

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Men Inject Own Blood

BNP NEWS DESK । Men Inject Own Blood   मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अपने ही खून का इंजेक्शन (ब्लड डोपिंग या ब्लड किक) लगाकर नशे की एक नई सनक उभर रही है।
इसमें युवा इंजेक्शन के जरिये अपना खून निकालकर दो-तीन दिनों तक फ्रीज कर दोबारा उसे शरीर में इंजेक्ट कर रहे हैं।

Men Inject Own Blood गांधी मेडिकल कालेज (जीएमसी) से संबद्ध हमीदिया अस्पताल में जनवरी से अब तक ऐसे कम से कम पांच मामले सामने आ चुके हैं।

इन मामलों में एक ही पैटर्न देखा गया है। पीड़ितों की उम्र 18 से 25 वर्ष के बीच है। ब्लड किक से बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव आया, वे चिड़चिड़े और हिंसक होने लगे।

 

जब स्वजन ने उनकी हरकतों पर पाबंदी लगाई, तो टकराव बढ़ गया। अंततः उन्हें मनोरोग विभाग लाया गया, जहां नशे के इस ट्रेंड का राजफाश हुआ।

 

हमीदिया अस्पताल के मनोरोग विभागाध्यक्ष डा. जेपी अग्रवाल का कहना है कि शरीर में अपना ही खून दोबारा डालने से कोई नशा नहीं होता।

 

यह मानसिक भ्रम और बिहेवियरल एडिक्शन (व्यवहारगत लत) है। युवा इंटरनेट मीडिया पर भ्रामक वीडियो और खतरनाक स्टंट्स को देखकर ऐसा कर रहे हैं।

दिमाग इस दर्द और उसके बाद मिलने वाली शांति को एक पुरस्कार की तरह देखने लगता है, जो धीरे-धीरे लत बन जाती है। Men Inject Own Blood

 

कभी एथलीटों ने लिया था इसका सहारा

 

विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशों में कई एथलीट अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए ब्लड किक या ब्लड डोपिंग (शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाना) का सहारा लेते रहे हैं। लास एंजिल्स ओलंपिक मे इसके उपयोग की चर्चा थी।
इसे वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी ने वर्ष 1985 में प्रतिबंधित कर दिया था, लेकिन यह अब युवाओं में एक घातक लत के रूप में फैल रहा है।

डाक्टरों के अनुसार, खून के माध्यम से नशा या ऊर्जा बढ़ाने के लिए आमतौर पर तीन खतरनाक तरीके अपनाए जाते हैं।

पहला – ब्लड ट्रांसफ्यूजन यानी किसी और का खून शरीर में चढ़ाना।

 

दूसरा – एरिथ्रोपोइटिन हार्मोन, जो लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाता है। इससे शरीर में कृत्रिम ऊर्जा का एहसास होता है।

तीसरा – सिंथेटिक आक्सीजन कैरियर्स यानी कृत्रिम रूप से विकसित किए गए ऐसे पदार्थ हैं, जो शरीर के ऊतकों तक आक्सीजन पहुंचाने का काम करते हैं, लेकिन इनका अनियंत्रित उपयोग हृदयाघात का कारण बनता है। Men Inject Own Blood

यह ऊर्जा नहीं, अंगों की तबाही है

विशेषज्ञों ने बताया कि बिना डाक्टरी सलाह के खून या उसके तत्व (जैसे प्लाज्मा) के साथ यह प्रयोग शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ देता है। यह न केवल अनैतिक है, बल्कि चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से शरीर के साथ किया गया सबसे बड़ा खिलवाड़ है।

यह प्रयोग क्लिनिकल डेथ

यह प्रयोग सीधे तौर पर क्लिनिकल डेथ (हृदय, सांस और रक्त परिसंचरण बंद हो जाना) की ओर ले जा सकता है। बार-बार खुद को सुई लगाने से नसों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। इससे सेप्सिस (खून में जहर फैलना), एचआइवी, हेपेटाइटिस, एनीमिया और आर्गन फेलियर (अंगों का काम बंद करना) जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा हो सकती हैं। Men Inject Own Blood

BNPNEWS
Author: BNPNEWS

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