BNP NEWS DESK। Jewelry Pattern सोने-चांदी के ऊंचे मूल्य ने खरीदारी के पैटर्न को पूरी तरह से बदल दिया है। लोग पुरानी ज्वैलरी या सिक्के ला रहे हैं और उन्हें नए गहनों से बदल रहे हैं। 80 प्रतिशत ग्राहक एक्सचेंज का विकल्प चुन रहे हैं।
शादी की खरीदारी में भी, कस्टमर पूरी तरह से नई ज्वेलरी खरीदने के बजाय पुरानी ज्वेलरी को अपग्रेड कर रहे हैं। कीमतें ज्यादा होने से हल्की ज्वेलरी की मांग बढ़ गई है, खासकर मशीन से बने डिजाइन की।
नौ कैरेट, 12 कैरेट और 14 कैरेट के जेवर हाथ से बनाना मुश्किल
Jewelry Pattern ज्वैलर्स का कहना है कि नौ कैरेट, 12 कैरेट और 14 कैरेट के जेवर हाथ से बनाना मुश्किल है, लेकिन इन्हें मशीन से बनाया जा सकता है।
ज्वैलर्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मेटल की कमी और मजबूत मांग से सोने और चांदी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। एक स्थानीय कारोबारी ने बताया कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक समूहों के बीच एक साफ बंटवारा नजर आता है।
एक समूह पेट्रो डालर माडल को आगे बढ़ा रहा है और दूसरा मेटल आधारित इकोनमी को प्रोत्साहित करने में लगा है। कई देशों ने अपने डालर डिपाजिट को सोने में बदल दिया है। इससे मांग बढ़ी है और अब मेटल की कमी के चलते अंतरराष्ट्रीय डिलीवरी भी टाली जा रही है। गुरुवार को जहां चांदी चार लाख के स्तर को पार कर गई वहीं सोना भी सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गया। खास बात यह है कि तेज वृद्धि के बावजूद घरेलू मांग मोटे तौर पर स्थिर बनी हुई है।
भारत आयात पर निर्भर, मूल्य नियंत्रण हमारे हाथ में नहीं
ज्वैलर्स का कहना है कि कीमतों में यह उछाल पूरी तरह से वैश्विक वजहों के चलते है। एक ज्वैलर ने कहा, “दुनियाभर में जो भी भू-राजनीतिक फैसले लिए जाते हैं, उनका तुरंत असर सोने और चांदी पर दिखता है। भारत बहुत ज्यादा आयात पर निर्भर है, इसलिए मूल्य नियंत्रण हमारे हाथ में नहीं है।”
ज्वैलर्स का मानना है कि आने वाले महीनों में भी तेजी जारी रह सकती है। उनका अनुमान है, “वैश्विक हालात को देखें तो सोना दो लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है और चांदी पांच लाख रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंच सकती है।






