BNP NEWS DESK। Devvrat Mahesh Rekhe विगत 50 दिनों तक वल्लभराम शालिग्राम सांगवेद विद्यालय, रामघाट में माध्यंदिन शाखा का एकाकी कंठस्थ दंडक्रम पारायण सकुशल संपन्न करने वाले महाराष्ट्र के वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे का आज विभिन्न सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं तथा वेद विद्यालयों एवं मठ- मंदिरों की ओर से नागरिक अभिनंदन तथा सम्मान किया गया। काशी में प्रथम बार तथा विश्व में दूसरी बार इस प्रकार का दंडक्रम पारायण संपन्न हुआ है।
जगद्गुरु शंकराचार्य महाराज के आशीर्वाद से, वैदिक सम्राट् श्रीकृष्ण शास्त्री गोडशे जी की जन्मशताब्दी के उपलक्ष्य में, वेदमूर्ति विश्वनाथ भट्ट जोशी जी (आलंदी) की स्मृति में तथा पारायणकर्ता की सौ.पूज्य माताजी के पावन स्मृति में काशी इतिहास में प्रथम बार आयोजित शुक्ल यजुर्वेद माध्यंदिनी शाखा का सम्पूर्ण एकाकी कंठस्थ दण्डक्रम पारायण करने वाले मुख्य पारायणकर्ता वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे घनपाठी जी के सम्मान में आज काशी के विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक, धार्मिक, मठ – मन्दिर एवं समस्त काशीवासियों के द्वारा रथयात्रा चौमुहानी से भव्य शोभायात्रा निकाली गयी।
Devvrat Mahesh Rekhe इसमें चिरंजीवी देवव्रत को रथ में बैठाया गया। उनके आगे विविध वैदिक विद्यालयों के बटुक ब्रह्मचारी वेद घोष तथा जय घोष करते हुए चल रहे थे। इस अवसर पर नागपुर महाराष्ट्र से आया हुआ विशेष वाद्य दल, नाद स्वर शिव गर्जना तथा शहनाई वादक भी आगे आगे चल रहे थे। रास्ते में जगह-जगह शोभायात्रा का स्वागत करते हुए पुष्प वर्षा भी की गई।
यह शोभायात्रा श्रृंगेरी मठ, महमूरगंज में आकर पूर्ण हुई, जहां अनेक मूर्धन्य विद्वानों की पावन उपस्थिति में भव्य अभिनन्दन समारोह आयोजित हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी जी महाराज विशिष्ट अतिथि के रूप में, श्री श्री महेश चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज (हरिद्वार ) सारस्वत अतिथि के रूप में तथा आचार्य राजाराम शुक्ल जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
सम्मान पत्र, स्वर्ण कंकण एवं दक्षिणा प्रदान की गयी

कार्यक्रम के अध्यक्ष आचार्य हृदयरंजन शर्मा जी थे। इस अवसर पर श्रृंगेरी शंकराचार्य जी महाराज की ओर से उनके प्रतिनिधि तंगीराज डॉ शिवकुमार शर्मा जी ने चिरंजीव देवव्रत महेश रेखे को सम्मान पत्र, स्वर्ण कंकण एवं दक्षिणा प्रदान की गयी।
दंडक्रम पारायण कर्ता अभिनंदन समारोह समिति की ओर से एक विशिष्ट सम्मान पत्र तथा अंगवस्त्र चिरंजीवी देवव्रत को प्रदान किया गया। अभिनंदन पत्र का वाचन आचार्य शैलेश कुमार तिवारी ने किया। साथ ही साथ देवव्रत के पिता एवं गुरु महेश चंद्रकांत रेखे, श्रोता देवेंद्र रामचंद्र गढीकर तथा पारायण संयोजक नीलेश केदार जोशी का भी सम्मान समिति की ओर से किया गया। इस अवसर पर काशी की विभिन्न संस्थाओं, मठ मंदिरों एवं विद्यालयों की ओर से चिरंजीव देवव्रत का नागरिक अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर श्रृंगेरी शंकराचार्य महाराज की ओर से आए हुए प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का प्रारंभ श्रृंगेरी शंकराचार्य जी महाराज की विरुदावली, पूजन तथा दीपक प्रज्वलन से हुआ। वैदिक विद्वानों के द्वारा वैदिक मंगलाचरण किया गया। सभी विद्वानों का स्वागत तथा विषय प्रस्ताव प्रोफेसर माधव जनार्दन रटाटे ने रखा। दंडकम के विषय में संक्षिप्त जानकारी श्री चंद्रशेखर द्राविड़ जी ने प्रदान की।
समस्त कार्यक्रम का संचालन श्री पांडुरंग लक्ष्मीकांत पुराणिक व संयोजन प्रदीप पाठक कारखेड़कर ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन श्री अनिल किंजवड़ेकर जी ने दिया।
इन संस्थाओं ने किया सम्मान
नूतन बालक गणेशोत्सव समाज सेवा मंडल, काशी गणेशोत्सव कमेटी, विद्यार्थी शारदोत्सव समिति, बृहन् महाराष्ट्र मंडल, श्री काशी महाराष्ट्र सेवा समिति, काशी गंगोत्सव मंडल, नारायण शिक्षण संस्थान, शारदा भवन गणेशोत्सव, श्री गणेशोत्सव सेवा समिति, काशी विद्वत् परिषद् , आपली काशी, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा, सनातन रक्षक दल, बंग समाज, आनंद कानन काशी ढूंढे परिवार, पंच द्रविड़ पुरोहित संघ, आंध्र आश्रम आदि संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। वैदिक विद्यालयों में रणवीर संस्कृत विद्यालय, पट्टाभिराम शास्त्री वेद मीमांसा अनुसंधान केंद्र, सुब्बा राव वेद मीमांसा अनुसंधान केंद्र, श्री गोपाल चंद्र मिश्र वैदिक उन्नयन संस्थान, काठिया बाबा वेद पाठशाला, मारवाड़ी संस्कृत विद्यालय, काशी विश्वनाथ वेद विद्यालय, ऋषिकुल ब्रह्मचर्य आश्रम अन्नपूर्णा मठ मंदिर, याज्ञवल्क्य काण्व वेद पाठशाला,विमलानंद तीर्थ वेद पाठशाला, पद्मवैद्यम् तीर्थ वेद विद्यालय, सतुवा बाबा विद्यालय आदि।
















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