BNP NEWS DESK। crypto currency वाराणसी में क्रिप्टो कैरेंसी में निवेश के बहाने 16.5 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गैंग के सरगना समेत तीन साइबर ठगों को साइबर क्राइम थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से मोबाइल, लैपटाप, नकदी बरामद हुए। इस मामले में एक ठग को पहले ही पकड़ा जा चुका है।
पकड़े गए ठगों के बारे में डीसीपी क्राइम टी सरवणन ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रामनगर के रहने वाले राजकुमार पुलिस को जानकारी दी थी कि बीएसजी नाम की फर्जी कंपनी ने क्रिप्टो करेंसी में निवेश के बहाने 16.5 करोड रुपये की ठगी किया है।
पुलिस की तीन टीमों का गठन
crypto currency जिसकी विवेचना निरीक्षक राजकिशोर पांडेय द्वारा की जा रही है। मामले की जांच के लिए पुलिस की तीन टीमों का गठन किया। टीमों ने सोनभद्र, लखनऊ और मुजफ्फरनगर पहुंचकर जांच की। टीमों को मिली जानकारी के आधार पर बदांयू के बुद्ध विहार कालोनी निवासी राजकुमार मौर्या, उन्नाव के उनवन निवासी अर्जुन शर्मा, रामनगर के गोला घाट के दानिश खान को गिरफ्तार कर लिया।
पकड़े गए ठगों की उम्र 24 से 28 वर्ष के बीच है। राजकुमार मौर्या के खिलाफ संभल में भी मुकदमा दर्ज है। पकड़े गए ठगों के पास से पांच आइफोन जिनकी कीमत चार लाख रुपये है। डेढ़ लाख रुपये का आइपैड, 98 हजार रुपये बरामद हुआ। ठगों ने बस्डग्लोबल डाट काम, डब्ल्यूडब्ल्यू डाट एमबीएसीवर्ल्ड डाट काम नाम से फर्जी वेबसाइट बनाकर सितंबर 2022 को बस्ड ग्लोबल (बीएसजी) नाम की कंपनी शुरू की गई थी।
फर्जी क्रिप्टो करेंसी बीएसजी नाम से बनवाया
इसका आफिस रामनगर में था। फर्जी क्रिप्टो करेंसी बीएसजी नाम से बनवाया। उसे वेन्डेक्स एक्सचेंज पर लिस्ट कराकर मल्टी लेवल मार्केटिंग के तौर पर लोगों से निवेश कराने लगे। उन्नाव का अर्जुन शर्मा, बदायूं का राजकुमार मौर्या, उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग का प्रकाश जोशी कंपनी के निदेशक थे। तीनों ही साइबर ठगी गिरोह का संचालन करते थे।
रामनगर के भीटी मच्छरहट्टा के नवनीत सिंह, शुभम मौर्या, पंचवटी के विकास नंदा, गोलाघाट का मो. दानिश खान, रामेश्वर पंचवटी के सत्यम पांडेय को सुपरवाइजर बनाया गया। इन लोगों ने स्थानीय युवकों को अच्छा वेतन और कमीशन का लालच देकर नौकरी पर रखा और इनके जरिए 600 दिन में रुपये दोगुणा करने का झांसा देकर लोगों से क्रिप्टो करेंसी में निवेश कराना शुरू किया।
स्थानीय युवकों को अपने साथ जोड़ा
ठगों ने वाराणसी और आसपास के जिलों के अलावा बिहार, झारखंड, उत्तराखंड के लोगों को शिकार बनाया है। बिहार के नवनीत सिंह ने रामनगर के पते पर अपना
आधार कार्ड बनवाया और स्थानीय परिचय देकर लोगों से मिलने लगा। उसने ही स्थानीय युवकों को अपने साथ जोड़ा। वे रुपये क्रिप्टो करेंसी में लगाते और उससे होने वाले लाभ से निवेशकों को पैसे देते थे। धीरे-धीरे उन्होंने सात अलग-अलग कंपनियां बना लीं और निवेश भी बढ़ने लगा।
अक्टूबर 2023 में कंपनी के निदेशकों ने घाटा बताकर लोगों को पैसा देना बंद कर दिया। एक्सचेन्ज से डी लिस्ट कराकर यह लोग सभी का रुपये लेकर फरार हो गये। इनके खिलाफ बीते साल मई में भी मुकदमा दर्ज किया गया था। उनके साथी पुलिस ने सर्विलांस की मदद से बिहार और झारखंड में छिप रहे मीरजापुर के अदलहाट के शुभम उर्फ विशाल मौर्या को गिरफ्तार किया था।
पुलिस को जानकारी मिली कि ठगी के शिकार हुए लोगों की संख्या लगभग तीन हजार है। आशंका है कि ठगी की रकम 50 करोड़ रुपये तक हो सकती है। साइबर ठगों को गिरफ्तार करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक अजय राज वर्मा, निरीक्षक विजय नारायण मिश्र, राजकिशोर पाण्डेय, विजय कुमार यादव, दीनानाथ यादव, विपिन कुमार, एसएसआइ श्याम लाल गुप्ता रहे।
















Discussion about this post