BNP NEWS DESK। monsoon 2025 देश का बड़ा हिस्सा भीषण गर्मी से तप रहा है। इस बीच मौसम विज्ञानी ने उम्मीद जताई है कि इस वर्ष अच्छी मानसूनी वर्षा हो सकती है। भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक मत्युजंय महापात्र ने बताया है कि इस साल बड़े पैमाने पर जलवायु संबंधी घटनाएं दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए अनुकूल हैं।
जून की शुरुआत तक अल नीनो का प्रभाव कम
monsoon 2025 महापात्र ने मध्य प्रशांत महासागर के गर्म होने का जिक्र करते हुए कहा, इस साल जून की शुरुआत तक अल नीनो का प्रभाव कम होता दिख रहा है। जुलाई-सितंबर में ला नीना की स्थिति देखी जा सकती है। मध्य प्रशांत महासागर के ठंडा होने की घटना को ला नीना कहते हैं। प्रबल अल नीनो की घटना कमजोर मानसून की स्थिति को दर्शाती है।
ला नीना की घटना भारतीय मानसून के लिए अच्छा है
इसकी वजह से भारत के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में सूखे का सामना करना पड़ता है, वहीं ला नीना से भारत में अच्छी मानसूनी वर्षा होती है।
महापात्र ने कहा, ला नीना की घटना भारतीय मानसून के लिए अच्छा है। वहीं अल नीनो की घटना अच्छी नहीं है। 60 प्रतिशत वर्षों में अल नीनो का भारतीय मानसून पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा, इस साल बर्फबारी भी कम हुई है। यह एक और सकारात्मक कारक है। इसलिए बड़े पैमाने पर जलवायु संबंधी घटनाएं मानसून के लिए अनुकूल हैं।
भारत की आधे से अधिक आबादी रोजगार के लिए कृषि पर ही निर्भर
भारत में वार्षिक वर्षा में से लगभग 70 प्रतिशत वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण ही होती है। यह वर्षा भारत में खेती के लिए महत्वपूर्ण है। भारत की जीडीपी में लगभग 14 प्रतिशत योगदान कृषि क्षेत्र का है। भारत की आधे से अधिक आबादी रोजगार के लिए कृषि पर ही निर्भर हैं।
बारिश की भविष्यवाणी के लिए तीन प्रमुख जलवायु घटनाओं पर विचार
भारत में 2023 के मानसून सीजन में 868.6 मिमी औसत की तुलना में 820 मिमी की “औसत से कम” संचयी वर्षा हुई। इसके लिए मजबूत अल नीनो को जिम्मेदार ठहराया गया था।
मौसम विभाग इस महीने के अंत में दक्षिण-पश्चिम मानसून का पूर्वानुमान जारी करने के लिए तैयार है। मौसम विभाग मानसून सीजन की बारिश की भविष्यवाणी के लिए तीन प्रमुख जलवायु घटनाओं पर विचार करता है।
इनमें अल नीनो, हिंद महासागर डाइपोल (आइओडी) और उत्तरी हिमालय और यूरेशियाई भूभाग पर बर्फबारी की घटना शामिल है। भूमध्यरेखीय हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी किनारों के अलग-अलग तापमान के कारण आइओडी की घटना होती है।








