BNP NEWS DESK। Voter ID Card मतदाता पहचान पत्रों में गड़बड़ी के आरोपों से निपटने के लिए चुनाव आयोग ने देशभर के मतदाता पहचान पत्रों (ईपिक) को आधार से जोड़ने का अहम फैसला लिया है। आयोग ने यह सुनिश्चित करने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम शुरू करने की योजना बनाई है। आयोग ने मंगलवार को कहा कि मतदाता कार्ड को आधार से जोड़ने का कार्य वर्तमान कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।
Voter ID Card चुनाव आयोग ने यह निर्णय केंद्रीय गृह सचिव, विधायी विभाग के सचिव और यूआइडीएआइ के सीईओ के साथ लंबी चर्चा के बाद लिया। इस चर्चा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डा. एसएस संधू और डा. विवेक जोशी भी शामिल थे। इस दौरान मतदाता पहचान पत्रों को आधार से जोड़ने से जुड़े सभी कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर विचार किया गया।
सूत्रों के अनुसार, आयोग ने मतदाता पहचान पत्रों को आधार से जोड़ने के लिए तैयार किए गए एप्लीकेशन के बारे में भी जानकारी दी और बताया कि इससे किसी भी तरह का डाटा साझा नहीं होगा। यह केवल मतदाताओं को प्रमाणित करेगा और फर्जी मतदाताओं की पहचान करेगा। Voter ID Card
आधार के ईपिक के जुड़ने से मतदाताओं को भी लाभ होगा। मूलभूत सुविधाओं की प्राप्ति के लिए लोग अक्सर आधार में अपना पता बदल लेते हैं, लेकिन ईपिक को बदलने की कोशिश कम करते हैं। आधार से जुड़ने के बाद ईपिक में बदलाव भी आसान हो जाएगा।
आयोग ने बैठक में लोक प्रतिनिधित्व कानून के अनुच्छेद 326 का हवाला दिया और कहा कि इसके तहत वोट देने का अधिकार केवल देश के नागरिकों को मिल सकता है और यह केवल आधार से प्रमाणित हो सकता है।
कानून के अनुसार, नागरिकता ईपिक का आधार है वही बायोमेट्रिक्स आधार कार्ड का आधार है। यही कारण है कि इसे आधार से जोड़ना आवश्यक है। आयोग के अनुसार, इस निर्णय से पहले संविधान से जुड़ी धारा 23(4), (5) और (6) के कानूनी पहलुओं पर विचार किया गया है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले को भी ध्यान में रखा गया है, जिसमें आधार को आवश्यक नहीं किया गया था। आयोग के सूत्र मानते हैं कि आधार से ईपिक को जोड़ने के लाभ को देखते हुए मतदाता स्वयं इसके लिए आगे आएंगे। Voter ID Card
मतदाता पहचान पत्र के आधार से जुड़ने पर ये मिलेगा फायदा
– मतदाता सूची से जुड़ी गड़बड़ियां खत्म होंगी।
– मतदाताओं की एक प्रमाणित सूची देश के सामने आएगी।
– मतदाता सूची में फर्जी नाम नहीं जुड़ सकेंगे।
– मतदाता सूची में अलग-अलग जगहों से कोई व्यक्ति नहीं जुड़ सकेगा यानी दो जगह वोटर कार्ड नहीं होगा।
– राजनीतिक दलों की शिकायतें खत्म हो जाएंगी।
99 करोड़ में से 66 करोड़ से अधिक मतदाताओं के आधार आयोग के पास
चुनाव आयोग के अनुसार, देश में वर्तमान में 99 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। इनमें से 66 करोड़ से अधिक के आधार आयोग के पास स्वैच्छिक रूप से उपलब्ध हैं। इस प्रक्रिया में आयोग को केवल बाकी के 33 करोड़ मतदाताओं के आधार जुटाने की चुनौती रहेगी, जिसे जल्द ही पूरा किया जाएगा। मतदाता पहचान पत्र को आधार से लिंक करने का काम ट्रायल के तौर पर 2015 में शुरू किया गया था।
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