BNP News DESK। Sorahiya Mela सनातन परंपरा व आस्था का प्रतीक सोरहिया मेला 18 सितंबर से शुरू होगा। मेला के लिए लक्ष्मी कुंड की साफ- सफाई, लाइटिंग व साज- सज्जा और लक्ष्मी मंदिर में रंगाई- पुताई और सजावट का काम चल रहा है। 16 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक मेले का समापन तीन अक्टूबर को जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) व्रत के साथ होगा।
मां महालक्ष्मी का दर्शन-पूजन और ऐतिहासिक लक्ष्मी कुंड में स्नान का विशेष महत्व
Sorahiya Mela लोक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में मां महालक्ष्मी का दर्शन-पूजन और ऐतिहासिक लक्ष्मी कुंड में स्नान का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि सोरहिया मेले के दौरान लक्ष्मी कुंड में स्नान कर मां लक्ष्मी के 16 स्वरूपों का ध्यान व पूजन करने से साधक को धन, धान्य, आरोग्य और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से संतान प्राप्ति और संतान की दीर्घायु के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु महिलाएं यहां आकर 16 दिनों तक नियम-संयम का पालन करते हुए अर्घ्य समर्पित करती हैं।
प्रशासन और नगर निगम ने व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और नगर निगम ने व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। मेले के मुख्य केंद्र लक्ष्मी कुंड की वृहद स्तर पर साफ-सफाई कराई जा रही है। कुंड क्षेत्र और आसपास के मार्गों को जगमगाती रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जा रहा है। सुरक्षा के दृष्टिगत कुंड के चारों ओर मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जा रही है और सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जा रहे हैं।







