Bnp news desk। Mamata Banerjee बंगाल विधानसभा में गुरुवार को बंगाल का स्थापना दिवस को लेकर प्रस्ताव पारित हुआ। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि हर साल अब पोइला वैशाख यानी बंगाली नववर्ष के दिन (14 या 15 अप्रैल को बंगाली कैलेंडर के प्रथम दिन) बंगाल का स्थापना दिवस मनाया जाएगा।
Mamata Banerjee राज्य सरकार की तरफ से विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन यह प्रस्ताव पेश किया गया। ममता ने इस दौरान कहा कि मैं रवींद्रनाथ टैगोर के ‘बांग्लार माटी, बांग्लार जल गीत’ को बंगाल का राज्य गीत बनाने के प्रस्ताव का भी समर्थन करती हूं।
मुख्य विपक्षी भाजपा के विधायकों ने प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। चर्चा के बाद मत विभाजन के दौरान प्रस्ताव के पक्ष में 167 वोट पड़े जबकि विरोध में विपक्षी भाजपा के 62 विधायकों ने मतदान किया। वहीं, आइएसएफ के इकलौते विधायक नौशाद सिद्दीकी ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।
ममता ने स्पष्ट कहा कि इस प्रस्ताव को राज्यपाल मंजूरी दें या नहीं दें उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्यपाल सीवी आनंद बोस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने विधानसभा से पूर्व में पारित प्रस्तावों को मंजूरी नहीं देने और राजभवन की ओर से देरी पर कहा कि हम देखेंगे कि राज्यपाल के पास ज्यादा शक्तियां हैं या लोगों के पास। ममता ने स्पष्ट कहा कि इस प्रस्ताव को राज्यपाल मंजूरी दें या नहीं दें उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। बंगाल सरकार पोइला वैशाख के दिन ही राज्य का स्थापना दिवस मनाएगी।
ममता ने बाद में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि इस प्रस्ताव को राज्यपाल के पास भेजने की भी जरूरत नहीं है, क्योंकि यह कोई बिल (विधेयक) नहीं है। वहीं, भाजपा ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि 20 जून को बंगाल दिवस मनाया जाए, जो दिन केंद्र सरकार ने तय किया है, क्योंकि इस दिन बंगाल विधानसभा ने विभाजन के पक्ष में मतदान किया था।
सभी भाजपा विधायक 20 जून को ही बंगाल दिवस मनाने के समर्थन में टीशर्ट पहनकर भी सदन में आए थे। बाद में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सभी भाजपा विधायकों ने बंगाल दिवस प्रस्ताव के विरोध में विधानसभा से नारेबाजी करते हुए पैदल चलकर राजभवन पहुंचे और इसके विरोध में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा।
बता दें कि केंद्र के निर्देश पर इस साल पहली बार 20 जून को यहां राजभवन में राज्य का स्थापना दिवस मनाया गया था, जिसका ममता ने कड़ा विरोध किया था। ममता ने विधानसभा में स्पष्ट कहा कि 20 जून को बंगाल का स्थापना दिवस मनाने का फैसला केंद्र का एकतरफा था, बंगाल के लोग इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे।








