Watch Video : देवदीपावली पर वाराणसी में गंगा, गोमती, वरुणा और असि के किनारे सजी दीपमालिकाएं

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Devdeepawali in Varanasi

BNP NEWS DESK। Devdeepawali in Varanasi सोमवार की शाम को पंचगंगा घाट पर जैसे ही हजारा दीप प्रज्ज्वलित हुआ, गंगा के किनारे साढ़े सात किलोमीटर का तट भी एक-एक करके जगमग हो उठा। अर्द्धचंद्राकार घाटों पर चंद्रहार की तरह दीपक झिलमिलाने लगे। पर्यटकों ने इस अलौकिक नजारे को देखा तो बस देखते ही रह गए। गंगा की लहरों पर सतरंगी इंद्रधनुष आकाश से उतर आया। शहर से लेकर गांव और पंचक्रोशी का परिक्रमा पथ पर दीपों के प्रकाश से दैदीप्यमान हो उठे। कुंड, सरोवर, तालाब और मंदिरों में भी दीप जलाए गए।

लोकल से ग्लोबल हो चुकी है देव दीपावली

 Devdeepawali in Varanasiकाशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद देव दीपावली को ऐतिहासिक बनाने के लिए डाक विभाग ने विशेष पहल की है। देव दीपावली, काशी विश्वनाथ धाम के साथ ही गंगा आरती पर विशेष आवरण और विरुपण चीफ पोस्टमास्टर जनरल कौशलेंद्र कुमार सिन्हा ने जारी किया। प्रधान डाकघर विश्वेश्वरगंज में चीफ पोस्टमास्टर जनरल ने कहा कि काशी की देव दीपावली अब लोकल से ग्लोबल हो चुकी है। श्री काशी विश्वनाथ धाम के नव्य-भव्य स्वरूप ने सभी को आकर्षित किया है। गंगा घाटों पर गंगा आरती की शोभा देखते बनती है। इन सभी पर विशेष आवरण व विशेष विरूपण जारी होने से वाराणसी की संस्कृति, परंपरा और धरोहर का और भी तेजी से देश-विदेश में प्रचार-प्रसार होगा।
काशी के प्रमुख घाटों में से एक दशाश्वमेध घाट पर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देकर कार्यक्रम की शुरुआत हुई। देव दीपावली का मुख्य कार्यक्रम राजघाट पर हो रहा है। चेत सिंह घाट पर लेजर शो शुरू हो गया है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के सामने गंगा पार रेती पर आतिशबाजी हुई।
उत्तरवाहिनी गंगा का विस्तृत पाट टिमटिमाते दीपों की जगमग में डूब गया। इसने गंगा के समानांतर ज्योति गंगा के हिलोर लेने का आभास दिया। आरती की लौ, धूप-दीप, लोबान की सुवास के बीच धार्मिक-सांस्कृतिक अनुष्ठान किया। मां गंगा की महाआरती करते बटुक तो चंवर डोलाती कन्याएं।

 

अदभुत अलौकिक और दिव्‍य दीपावली चौरासी गंगा घाटों पर

 

कार्तिक मास की पूर्णिमा पर काशी की अदभुत अलौकिक और दिव्‍य दीपावली चौरासी गंगा घाटों पर अपनी स्‍वर्णिम आभा बिखेर रही है। शाम को दीपों की दपदप, विद्युत झालरों की जगमग, सुरों की खनक, कहीं गीत-संगीत की सरीता बह रही है। फूलों की सुवास तो कहीं चटकीले रंगों का वास। सच कहें तो गंगा की लहरों पर सतरंगी इंद्रधनुष आकाश से उतर आया। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में शुक्रवार शाम गंगधार स्वर्ण रश्मियों की फुहार से नहाई।

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Author: BNPNEWS

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