वैश्विक खाद्यान्न संकट के बीच अनाज निर्यात को लेकर डब्ल्यूटीओ नियमों से परेशानीः सीतारमण

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बीएनपी न्‍यूज डेस्‍क।  Global food crisis वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि यूक्रेन संकट के कारण वैश्विक स्तर पर उत्पन्न खाद्यान्न की कमी के बीच अनाज के निर्यात के जरिए इस समस्या का समाधान निकालने की क्षमता रखने वाले भारत जैसे देशों को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सीतारमण ने शुक्रवार को यहां भारतीय संवाददाताओं के एक समूह से कहा कि हाल में समाप्त हुई अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की सालाना वसंत बैठक के दौरान भारत की चिंताओं के जवाब में डब्ल्यूटीओ की महानिदेशक नगोजी ओकोंजा इवेला ने कहा कि संगठन इस ओर सकारात्मक रूप से ध्यान दे रहा है और इसका समाधान निकलने की उम्मीद है।
इस संवाददाता सम्मेलन में सीतारमण के साथ अमेरिका में भारत के राजदूत तरनजीत सिंह संधू भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत से खाद्यान्न संकट की स्थिति में मदद देने का अनुरोध किया है।

सीतारमण ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘पूर्ण सत्र के दौरान डब्ल्यूटीओ की प्रतिक्रिया बहुत ही सकारात्मक थी। मुझे उम्मीद है कि हम दशक भर पुरानी उस बाधा से पार पा सकेंगे जो हमें खाद्य सुरक्षा उद्देश्यों के लिए आवश्यक अतिरिक्त भंडार के बाद हमारे कृषि उत्पादों का उपयोग करने से रोकती रही है। इसका लाभ किसानों को भी मिलेगा।’’

उन्होंने कहा कि भारत ने यूक्रेन संकट की पृष्ठभूमि में खाद्यान्न निर्यात और विनिर्माण के अवसरों की पहचान की है।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘हमने अवसरों की पहचान की है और उस दिशा में आगे बढ़े हैं…खाद्यान्न विशेषकर गेहूं के निर्यात को लेकर। हमारे द्वारा विनिर्मित उत्पादों को ऐसे गंतव्यों तक पहुंचाने के अवसर हम खोज रहे हैं जहां आपूर्ति में अवरोधक पैदा हो गए हैं।’’
उन्होंने कहा कि इस युद्ध (रूस-यूक्रेन) ने कई सच्चाईयां दुनिया के सामने ला दी हैं।सीतारमण ने कहा, ‘‘एक सत्र में मैंने अपनी बात रखी थी कि भारत जैसे देश जिनमें कृषि उत्पादों विशेषकर अनाज के निर्यात की क्षमता है वे डब्ल्यूटीओ में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।’’

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Author: BNPNEWS

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