BNP NEWS DESK। Trinamool Congress बंगाल के राजनीतिक गलियारों में नया चुनाव निशान एक बड़े विवाद का कारण बन गया है। तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ बनाने वाले ऋतब्रत बनर्जी गुट को चुनाव आयोग की ओर से ‘लिफाफा’ (खाम) प्रतीक चिन्ह आवंटित किया गया है। आयोग के इस फैसले के बाद इंडियन सेक्युलर फ्रंट और नए दल के बीच तीखा टकराव शुरू हो गया है।
आईएसएफ ने भी दावा ठोक खटखटाया आयोग का दरवाजा
आईएसएफ के संस्थापक और एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी ने चुनाव आयोग के इस कदम को अपनी पार्टी को कमजोर करने की राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने शुक्रवार को दस्तावेज पेश करते हुए स्पष्ट किया कि 2021 में पार्टी की स्थापना के बाद से ही आइएसएफ ‘लिफाफा’ चिन्ह पर चुनाव लड़ रही है और मार्च 2026 में इसका नवीनीकरण (रिन्यू) भी कराया गया था।
नौशाद सिद्दीकी ने आयोग को कानूनी चुनौती देते हुए पत्र भेजा है और जरूरत पड़ने पर अदालत का रुख करने की बात कही है। दूसरी ओर, ऋतब्रत गुट के प्रत्याशी एहतेशामुल हक ने नए चुनाव चिन्ह का स्वागत करते हुए इसे अपने चुनाव प्रचार का मुख्य आधार बनाने का एलान किया है। एक ही चुनाव चिन्ह दो अलग-अलग दलों के पास होने से आगामी चुनावों में मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा होना तय माना जा रहा है।







