दुनिया में हफ्तों तक बढ़ी रह सकती हैं कीमतें

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 BNP NEWS DESK।   oil crisis कुवैत की राष्ट्रीय तेल कंपनी कुवैत पेट्रोलियम कारपोरेशन (केपीसी) ने अप्रत्याशित स्थिति की घोषणा करते हुए शनिवार से कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती शुरू कर दी। इराक और कतर के बाद केपीसी के इस कदम से तेल व गैस उत्पादन में कटौती और बढ़ गई है।

oil crisis युद्ध शुरू होने के बाद से दुनियाभर में तेल और गैस की कीमतों में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई है और जानकारों का कहना है कि यह वृद्धि युद्ध के जल्द खत्म होने के बावजूद कई हफ्तों या फिर महीनों तक जारी रह सकती है। इसकी वजह यह है कि आपूर्तिकर्ताओं को खराब सुविधाओं, बाधित लाजिस्टिक्स और शिपिंग के लिए बढ़े हुए खतरों से जूझना पड़ सकता है।

अमेरिका-ईरान युद्ध ने दुनिया के सबसे आवश्यक तेल मार्ग स्ट्रेट आफ होर्मुज को बंद कर दिया है, जिससे दुनियाभर में तेल और एलएनजी की 20 प्रतिशत आपूर्ति होती है। विश्लेषकों का अनुमान है कि संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को भी जल्द ही उत्पादन में कटौती करनी होगी क्योंकि उनके पास तेल का भंडारण खत्म हो जाएगा। oil crisis

कुवैत ने प्रतिदिन लगभग 26 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन किया

हालांकि, केपीसी ने यह नहीं बताया है कि वह उत्पादन में कितनी कटौती करेगी। फरवरी में कुवैत ने प्रतिदिन लगभग 26 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन किया था।
कंपनी ने कहा कि यह कमी एहतियात के तौर पर की गई है और हालात बदलने पर इसकी समीक्षा की जाएगी। उसने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के सुरक्षित मार्ग के विरुद्ध स्पष्ट धमकियां दी हैं और ईरान कुवैत पर लगातार हमले भी कर रहा है। गौरतलब है कि केपीसी एशिया को नेफ्था का एक बड़ा निर्यातक है और उत्तर-पश्चिम यूरोप को जेट ईंधन का एक बड़ा निर्यातक है।

 

जानकारों का कहना है कि अगर संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब ने भी तेल उत्पादन में कटौती की घोषणा कर दी थी तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर काफी असर पड़ेगा।
इस बीच चीन की दो रिफाइनरियों ने उत्पादन घटा दिया है। साथ ही रिफाइनरियों से ईंधन का निर्यात रोकने को भी कहा है। थाईलैंड ने भी ईंधन का निर्यात रोक दिया है, जबकि वियतनाम ने कच्चे तल का शिपमेंट रोक दिया है। रूस को इसका फायदा मिला है और उसके कच्चे तेल के कार्गो की कीमतें बढ़ गई हैं। oil crisis

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Author: BNPNEWS

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